Sunday, March 28, 2010

तुम्हारी स्मृतियाँ


सुकोमल मधुर

वे तुम्हारी स्मृतियाँ

जैसी तुम

एक ऊर्जा प्रवाह

प्रवाहित होता जो निरंतर

प्रकृति में

मेरे ह्रदय में,


कभी धुंधली ना हुई जो,

हर पल में शामिल हे जो मेरे

वे तुम्हारी स्मृतियाँ

कोटि सूर्यों की लालिमा सी

अनंत तारों की झिलमिलाहट सी

झिलमिलाती

वे तुम्हारी स्मृतियाँ

सुनाई देती हे पदचाप

अंतर्मन में तुम्हारे साथ की

वो हमारे प्रेम को साक्षात दर्शाती

तुम्हारी वे स्मृतियाँ

मेरे मन को महकाती

हर्षाती

सुकोमल , मधुर

तुम्हारी वे स्मृतियाँ



विशाल 2८.०३.२०१०


5 comments:

  1. welcome on blog....nice to see you...

    congrates 4 ur first post on the blog..

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  2. मेरे मन को महकाती

    हर्षाती

    सुकोमल , मधुर

    तुम्हारी वे स्मृतियाँ



    बहुत अच्छा लिखतें हैं आप विशाल जी.
    सुन्दर मनोहारी भाव दिल को छूते हैं.
    आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.

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  3. वाह ...बहुत ही अच्‍छी रचना ।

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  4. वाह ...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

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