Tuesday, March 30, 2010

" ये दुनिया ..."






अजनबी ,गुमनाम सी ये दुनिया ....
कभी जानी पहचानी सी नज़र आती ये दुनिया ....

कभी अँधेरे में....
तो कभी उजालों में नज़र आती ये दुनिया ....


सुलझी हुई थी पहले ...

अब कशमकश में नज़र आती ये दुनिया....

मुश्किल में होता हूँ ,जब कभी.....
रंग तब दिखलाती हे ये दुनिया....

खुबसूरत सी लगने वाली हर तरफ से ....
भीतर से बेनूर नज़र आती हे ये दुनिया...

कभी नज़दीक लाये कभी तो .....
कभी खुद दूरियाँ बढ़ा देती हे ये दुनिया....
ख़ुशी में साथ रहती हे जो कभी ......
गम में ठुकरा देती हे ये दुनिया.....

हर तरफ से अंधेरों से भरी....
तुम्हारे प्यार से रोशन नज़र आती हे ये दुनिया ....
विशाल ३१.०३.10


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