
तुम्हारी ख्यालों से ,
मचल उठता हे मन !
जाने कितनी यादें हे दिल में
छलक रही हे हर धड़कन !
कल जाने क्या बात थी ,
प्यार के सपनो से छलकती रात थी !
आज की ये "सुहानी " सुबह
ले आई हे आँखों में ,
किसी सपने की रंगीन यादें !
तुम्हारा प्यार और तुम्हारा " स्पर्श"
अभी भी हे जैसे मेरे बदन पर !
कोई पहचाने से गीत की तरह ,
मीठी सी वो यादें
झनझना सी रही हें मेरे बदन में !
पर क्या था, वो सपना ?
क्यों याद नही आता ?
क्या था उसमे ऐसा
की
चाँद उसे चुराकर ले गया !
...............29.03.2010
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