Monday, March 29, 2010

मेरी तुम


तुम्हारी ख्यालों से ,

मचल उठता हे मन !


जाने कितनी यादें हे दिल में

छलक रही हे हर धड़कन !


कल जाने क्या बात थी ,

प्यार के सपनो से छलकती रात थी !


आज की ये "सुहानी " सुबह

ले आई हे आँखों में ,

किसी सपने की रंगीन यादें !


तुम्हारा प्यार और तुम्हारा " स्पर्श"

अभी भी हे जैसे मेरे बदन पर !


कोई पहचाने से गीत की तरह ,

मीठी सी वो यादें

झनझना सी रही हें मेरे बदन में !


पर क्या था, वो सपना ?

क्यों याद नही आता ?


क्या था उसमे ऐसा

की

चाँद उसे चुराकर ले गया !


...............29.03.2010

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