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यूँ लगता है ;
जैसे तुम सब कुछ हो ...............
और में एक क़तरा
समंदर ............. !
तुम हो असीमित ;
सितारों से भरा आकाश ......
मेरे विचारो से निकली
सुबह की पहली किरणों का
प्रकाश ..... ...... !
तुम हो ;
किसी परिंदे की पहली उड़ान ........
किसी नन्हे बच्चे को लिए हाथों में ,
माँ की कोमल छूअन ...........................!
तुम हो सावन की ठंडी ;
बयार .................
वीणा के तारों से अलापती ,
एक मधुर झंकार .........................!
तुम पूर्ण हो ;
और में एक अधूरा ख्वाब ........
जिसकी पूर्णता तभी हे
जब इसे देखो तुम ,
एक नज़र ..............................!
तुम हो एक सार्थक प्रयास ;
तुम हो अभिलाषा .........................
उन सभी अभिलाषाओं की ,
जिनको सभी करना चाहते हे ....
पूरी
सब दिन रात........................!
तुम लगन हो ,
मेरे जीवन की ;
आस मेरे जीवन की .........
तुम अंदाज़ हो मेरा
कुछ ख़ास ,
मेरे घर का
सौभाग्य ......
गृहलक्ष्मी , अन्नपूर्णा
सुख समृद्धि की देवी .............!
मेरे लिए माता पिता का
शुभाशीष .........
तुम हो मेरे जीवन की सम्पूर्णता ,
तुम हो विश्वास ,,,,,,
मेरा आभास ..........................!
तुम हो एक कहानी ;
जो कभी नही कही गयी............
दृश्य ,
जो कभी दिखाई नहीं दिया..........!
तुम एक सच्चाई हो
मेरी ....
जिसे कोई बदल नही सकता ,
तुम मेरी किस्मत में नहीं .......
खुद मेरी किस्मत हो ....................!
तुम हो एक आदर्श ,
सबके लिए ..........
तुम हो सर्वत्र ,
सभी जगह..................!
तुम कोई कृति नही ,
खुद रचयिता हो........
जीवन का उद्देश्य देती ;
जो सबको ..................!
तुम हो अंतहीन ,
तुम हो मेरे जीवन की .....
प्रथम और
अंतिम
अभिलाषा ..........................
अनंत तक ............................................. !
विशाल 29.03.2010
सब दिन रात........................!
तुम लगन हो ,
मेरे जीवन की ;
आस मेरे जीवन की .........
तुम अंदाज़ हो मेरा
कुछ ख़ास ,
मेरे घर का
सौभाग्य ......
गृहलक्ष्मी , अन्नपूर्णा
सुख समृद्धि की देवी .............!
मेरे लिए माता पिता का
शुभाशीष .........
तुम हो मेरे जीवन की सम्पूर्णता ,
तुम हो विश्वास ,,,,,,
मेरा आभास ..........................!
तुम हो एक कहानी ;
जो कभी नही कही गयी............
दृश्य ,
जो कभी दिखाई नहीं दिया..........!
तुम एक सच्चाई हो
मेरी ....
जिसे कोई बदल नही सकता ,
तुम मेरी किस्मत में नहीं .......
खुद मेरी किस्मत हो ....................!
तुम हो एक आदर्श ,
सबके लिए ..........
तुम हो सर्वत्र ,
सभी जगह..................!
तुम कोई कृति नही ,
खुद रचयिता हो........
जीवन का उद्देश्य देती ;
जो सबको ..................!
तुम हो अंतहीन ,
तुम हो मेरे जीवन की .....
प्रथम और
अंतिम
अभिलाषा ..........................
अनंत तक ............................................. !
विशाल 29.03.2010
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