Sunday, July 25, 2010

What i do?





I am walkin' on the dead end...

i dont find the horizons but...

it hurts somtime ...

why people..fall in love...


i never wished so...

how ever i survived but...

somtime i realise...

why i'm ascaping ...


i am becoming cowerd...

no i am not so but ...

i can do every thing...

i am me ..... !


on the every way...

i can face the life...

i'v to ...

then why ?...


i am running from the life ..

i'v to live for me...

i'v to get into a star..of this galaxy....

but i m walkin' on the the dead end...

i don't find the horizons...



vishal kasera

25.07.2010

Sunday, July 11, 2010

ME AND YOU TOGETHER....FOREVER


तुम्हारा और मेरा साथ,

हर पल,हर समय,हर युग में ,

शास्वत जेसे आकाश ,


तुम्हारा मेरे साथ होना जेसे,

मेरी साँसों का तारतम्य ,

मेरे ह्रदय की धड़कन,


कुछ भी कल्पित नहीं ,

तुम से ही में हूँ ,

मुझसे ही तुम्हारी कहानी !


अधरों से तुम्हारा नाम लेता ,

तुम्हारे सुहाने स्पर्श को अनुभव करता ,

आदि से लेकर अनंत तक !


तुम्हारा होने मात्र का स्वप्न देखता हूँ ,

तुमको अपना सर्वस्व मानता हूँ ,

तुम्हारे हाथ थामने को तरसता ,

में आदि से अनत तक !
विशाल 11.07.2010



Thursday, July 1, 2010

तुम जानती हो... ना !



मै जब भी दर्पण देखता हूँ
सोचता हु, रुकता हूँ, फिर सोचता हूँ
की ये कौन हे,

क्या ये में हूँ,
में ऐसा क्यों हूँ,
में ऐसा नही हूँ,,
फिर में क्यों ऐसा नजर आ रहा हूँ,

चेहरे पर शिकन,
आँखों मै थकन ॥
आँखों के नीचे काले घेरे ,,
ये मै नहीं हूँ,

मै तो खिलखिलाता था
मुस्कुराता था,
आँखों में चमक दिखाई देती थी कभी मेरी,,
में ऐसा क्यों हो गया हूँ,,

अधर सूख से गए हे ,
हंसी कंही गम सी हो गयी हें
मेरे चेहरे पर पर खुशियाँ दिखाई देती थी सबको,,
पर ये में नहीं हूँ,,

क्यों कोई उम्मीद नज़र नही आ रही है
क्यों कोई ख़ुशी नज़र नहीं आती ,,
क्यों मेरी आँखे बेजान हो गई हें,,
क्यों इनमे चमक नही हें ,,,

तुम जानती हो ना !
विशाल 01.07.2010