
तुम्हारा और मेरा साथ,
हर पल,हर समय,हर युग में ,
शास्वत जेसे आकाश ,
तुम्हारा मेरे साथ होना जेसे,
मेरी साँसों का तारतम्य ,
मेरे ह्रदय की धड़कन,
कुछ भी कल्पित नहीं ,
तुम से ही में हूँ ,
मुझसे ही तुम्हारी कहानी !
अधरों से तुम्हारा नाम लेता ,
तुम्हारे सुहाने स्पर्श को अनुभव करता ,
आदि से लेकर अनंत तक !
तुम्हारा होने मात्र का स्वप्न देखता हूँ ,
तुमको अपना सर्वस्व मानता हूँ ,
तुम्हारे हाथ थामने को तरसता ,
में आदि से अनत तक !
विशाल 11.07.2010
No comments:
Post a Comment