नयी दुनिया नये रास्ते..
हम फिर चले इन पर ए दोस्त तेरे वास्ते..
तेरा मेरा कोई पुराना कोई रिश्ता लगता हे ॥
सामने का नज़ारा कितना सुहाना लगता हे ..
हलकी से कोई परछाई दिखाई देती हे..
तेरी आहट फिर सुनाई देती सी ह़े ..
क्यों खड़ा हे राहों में हाथो को बांधे..
मीलो दूर से हमे तेरी आवाज़ सुनाई देती सी है॥,
vishal 6.08.2010
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