Sunday, September 12, 2010

Self Confidence



बुलंदियों पर पहुचने की ख्वाइश हमें भी हे..


.चाँद को छूने का हौसला भी हम रखते हे ..


तोड़ कर बिछा देंगे तारे तेरी राहों में ...


आसमान में सीढियाँ बनाने का हुनर भी हम रखते हे...



ए ज़ालिम ज़माने तुझको गुरुर किस बात का हे ..


मेरी हिम्मतो पर तुझको ऐतराज किस बात का हे ..


मेरी कमजोरियों को देख कर मुझे पर हसने वाले..


तूफ़ान से भरे समुन्दर में ..


कश्तिया बचाने का हुनर भी हम रखते हे ॥





विशाल १२.०९.2010



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