
मै घना अँधेरा हूँ ...
आज मेरे सीने पर ......
जुगनुओं के पर रख दो !
रंगों में नहला दो मुझे ....
इन सुलगती पलकों पर .....
तितलियों के पर रख दो .......!
चाहे कोई दिन हो या वक़्त ......
दिन गयी बहारों के ,
फिर से लौट आयेंगे ........
बस एक फूल की कली .....
अपने होठों से छूकर .......
मेरे होठों पर रख दो .......................!
विशाल २९.०३.१०
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