Monday, March 29, 2010

कुछ ऐसा कर दो .....










मै घना अँधेरा हूँ ...



आज मेरे सीने पर ......



जुगनुओं के पर रख दो !






रंगों में नहला दो मुझे ....



इन सुलगती पलकों पर .....



तितलियों के पर रख दो .......!




चाहे कोई दिन हो या वक़्त ......



दिन गयी बहारों के ,



फिर से लौट आयेंगे ........






बस एक फूल की कली .....



अपने होठों से छूकर .......






मेरे होठों पर रख दो .......................!









विशाल २९.०३.१०

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